Triple Talaq Meaning in Hindi

शादी का मतलब सभी धर्मो में एक ही माना जाता है। नाम भले ही अलग होजाए लेकिन मकसद यही होता है की शादी या निकाह के बाद लड़का और लड़की दोनों अपनी ख़ुशी से साथ रहे और अपने वंश को आगे बढ़ाए। लेकिन मुस्लिम और इस्लाम धर्म में इस शादी या निकाह को तोड़ने के लिए लोग जिस तरीके का इस्तेमाल करते है उसे ट्रिपल तलाक कहा जाता है। मुस्लिम धर्मं में अगर शोहर ने अपनी पत्नी को तीन बार तलाक तलाक तलाक बोला तो उसके बाद ना तो वो दोनों साथ रह सकते है और ना ही उनके बीच समझौता हो सकता है। चाहे यह बात उसने गुस्से में बोली हो या किसी वजह से। तीन बार यह शब्द बोलना ही उनके रिश्ते को खत्म करने के लिए काफी होता है। यही वजह है की मुस्लिम महिलाये चाहती है की इस चीज़ को बदला जाए तो उन्हें इंसाफ मिले। उनका कहना यह है की उनकी कुरान में ऐसा कोई कानून नही है जिसके तहत उनके शोहर उनके साथ यह अन्याय करते है।

ट्रिपल तलाक का मतलब

मुस्लिमो के अनुसार ट्रिपल तलाक का मतलब यह है की उन्हने तीन बार अपनी बीवी को अगर तलाक बोल दिया तो फिर वो दोनों साथ नही रह सकते। असल में सच यह है की ट्रिपल तलाक का हक़ केवल मर्द को ही होता है केवल वह ही अपनी बीवी को तलाक दे सकता है। ट्रिपल तलाक देने के तीन तरीके होते है। पहला तलाक-ए-रजई दूसरा तलाक-ए-बाइन और तीसरा तलाक-ए-मुगल्लज़ा। तीनो ही तलाक का मतलब और तरीका अलग होता है लेकिन नतीजा केवल यह की इसके बाद दोनों पति पत्नी को अलग रहना पड़ता है और किसी भी कोशिश के बाद भी उनका समझौता नही हो सकता।  पहले तलाक के अनुसार जब शोहर अपनी बीवी को तलाक देता है तो उसे कुछ दिन सोचने का समय भी दिया जाता है जिससे अगर उन दिनों में उसका इरादा बदल जाये या उनके बीच समझौता हो जाए तो तलाक रुक सकता है लेकिन अगर ऐसा नही होता है तो वो अपनी बीवी को दोबारा तलाक बोलकर अलग हो सकता है। दूसरे तलाक के अनुसार अगर पहले तलाक में उनका समझौता नही होता है तो वो एक दूसरे के साथ आ सकते है लेकिन इसमें पत्नी का राजी होना भी जरुरी है बिना पत्नी की इजाजत के वो दोनों साथ नही आ सकते और अगर साथ आना भी चाहे तो उन्हें दोबारा निकाह करना होगा। तीसरे तलाक के अनुसार अगर शोहर ने फिर से तलाक बोल दिया तो अब वो दोबारा साथ नही रह सकते अगर वो निकाह भी करना चाहे तो वो भी नही हो सकता उनको अलग ही होना पड़ेगा।

ट्रिपल तलाक कैसे दिया जाता है ?

ट्रिपल तलाक देने का अधिकार केवल मर्द के पास ही होता है यही वजह है की मुस्लिम महिलाये इसके खिलाफ है। वह चाहती है की इस ट्रिपल तलाक पर कार्यवाही की जाए। ट्रिपल तलाक के अनुसार अगर शोहर ने अपनी पत्नी को किसी भी वजह से तीन बार तलाक बोल दिया तो उन दोनों को अलग होना पड़ेगा।  यह बात चाहे शोहर गुस्से में कहे या किसी और वजह से उसका यह तीन शब्द बोलना ही काफी है। असल में देखा जाये तो आप चाहे दस बार बोले या तीन बार उस बात का मतलब तो नही बदलेगा लेकिन फिर भी यह मुस्लिम धर्म में होता है। मुस्लिम लॉ के अनुसार जब पति पत्नी को लगने लगे की उनके आपसी मतभेद बहुत ज्यादा बढ़ चुके है और अब साथ रहना नामुमकिन है तब यह तलाक की प्रक्रिया होती है।

मुस्लिम तलाक लॉ

मुस्लिम लॉ के नियमो के अनुसार तीन बार तलाक बोलना ही पति पत्नी के अलग होने के लिए काफी है। मुस्लिम लॉ में महिलाओ के लिए बहुत से नियम और कानून है जिनको महिलाओ की सुरक्षा और सुविधा के लिए बनाया गया है लेकिन उनपर कोई अमल नही करता। मुस्लिम महिलाये सरकार से यही उम्मीद कर रही है की इस तीन तलाक पर कोई कार्यवाही की जाए तो महिलाओ के हक़ में कोई फैसला लिया जाए। यह तीन बार तलाक बोलकर अलग होने का तरीका सही नही है इससे उनकी ज़िन्दगी खराब होती है। शोहर तो अपनी ज़िन्दगी आसानी से जी लेते है लेकिन महिलाओ को बहुत मुसीबत का सामना करना पड़ता है जो सही नही है। उन्हें उम्मीद है की नयी सरकार उनकी मदद जरूर करेगी।

सही मायनो में देखा जाये तो एक दूसरे से अलग होने का यह तरीका गलत है। अगर शोहर को अपनी मर्ज़ी से तलाक देने का हक़ है तो पत्नी को भी उतना ही होना चाहिए। अगर वो तलाक चाहते है तो उसमे दोनों की मर्ज़ी होनी चाहिए जिससे किसी को भी कोई परेशानी ना हो और दोनों ही आराम से अपनी बाकि ज़िन्दगी अलग होने के बाद ख़ुशी ख़ुशी जी सके। सारे लड़ाई झकड़े का किस्सा यह ट्रिपल तलाक ही है और उम्मीद है इसपर जल्द से जल्द कोई एक्शन जरूर लिया जाएगा और कोई अच्छा समाधान ही मिलेगा।

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