Holi (होली) 2017: पूजा मुहरत, होलिका दहन का समय, पूजा विधि और पूजा सामग्री की पूरी जानकारी




होली हिन्दुओ का एक प्रमुख त्योहार है। इसे हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मनाया जाता है। होली को रंगों का त्योंहार भी कहा जाता है। इसदिन बच्चे, बूढ़े, जवान सब एक दूसरे को रंग लगाते है, मिठाईया खाते है और गले लग कर बधाई देते है। यह त्योहार एकता और भाईचारे का प्रतीक है। ज्यादातर बच्चो को यह त्योहार बड़ा ही प्रिय होता है। कई दिन पहले से ही वो इसकी तैयारियो मे लग जाते है। बाज़ारो मे रंग, गुलाल, पिचकारी और मिठाईया मिलनी शुरू हो जाती है। सभी इस त्योहार को बड़े चाव से मनाते है।

होली क्यों मानते है ?

होली का प्रमुख त्यौहार मनाने के पीछे कई वजह है। पहला तो यह रंगों का और खुशियो का त्यौहार है दूसरा इसके पीछे एक महवपूर्ण कथा है जो हमने नीचे दी हुई है। होली का त्यौहार हर राज्य मे अलग अलग तरीको से मनाया जाता है। कृष्ण जी की जन्म भूमि पर तो होली अलग ही तरीके से मनाई जाती है। मथुरा वृन्दावन मे फूलो से होली खेली जाती है। वहा की लठमार होली भी बहुत प्रसिद्ध है। लोग बहुत दूर दूर से यह नज़ारा देखने के लिए आते है। हफ़्तों पहले से ही वहा होली की तैयारियां शुरू हो जाती है सभी इस त्योहार को बड़े चाव और ख़ुशी के साथ मनाते है।

होलिका स्थापना

होली की स्तापना जिस दिन होली जलाई जाती है उसदिन करते है। इसको आप अपने घर के आंगन मे या घर के बाहर भी रख सकते है। इसकी स्तापना सुबह ही कर दी जाती है। सभी लोग अपने रीती रिवाज़ों के अनुसार इसे पूजते है और फिर शाम के समय मुहूर्त के अनुसार इसे जलाकर होली पूजन या होली पूजते है। इससे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रमाण मिल जाता है और सब बड़ी ख़ुशी के साथ इसे मनाते है।

होलिका इतिहास (History) 

एक बहुत पुरानी कथा के अनुसार एक राजा हिरण्यकश्यप का बेटा प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। वह पूरी श्रद्धा के साथ उनकी पूजा और अर्चना करता था। हिरण्यकश्यप ने कई बार अपने बेटे को समझाया की वो विष्णु की पूजा करना छोड़ दे पर वह नही माना। उसकी भक्ति भाव को देख कर हिरण्यकश्यप ने तय किया की उसे मरवा दिया जाए। राजा ने पुत्र प्रहलाद को मरवाने की बहुत कोशिश की पर भगवान विष्णु की कृपया से वो हमेशा असफल रहा। तब थक कर उसने अपनी बहन होलिका को बुलाया। होलिका को वरदान था की वह आग मे जल नही सकती। दोनों भाई बहन ने मिलकर पप्रहलाद को मारने की योजना बनाई। एक दिन होलिका प्रहलाद को गोद मे लेकर आग में बैठ गई उसे विश्वास था की वह नही जलेगी और प्रहलाद जल कर खत्म हो जाएगा। पर ऐसा नही हुआ। कुछ ही देर मे होलिका जल कर राख हो गई और प्रहलाद का बाल भी बाका नही हुआ। इसी बुराई पर अच्छाई की जीत पर होली का त्यौहार मनाया जाता है।

होली पूजा विधि

  1. जैसा की होली एक दिन पहले जलाई जाती है उसके लिए पेड़ पत्तो और लकडियो का एक ढेर तैयार किया जाता है।
  2. उसके चारो तरफ फेरी लेकर उसे रोली, चावल, चन्दन, घी का दीपक आदि से उसे पूजा जाता है।
  3. सभी लोग उसकी श्रद्धा से पूजा करते है और भगवान से सुख शांति की प्रार्थना करते है। इसके बाद रात के समय उसे जलाया जाता है।
  4. होली बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है इसीलिए इसे जलाकर इस बात का प्रमाण दिया जाता है। होली खुशियो और रंगों का त्यौहार है।
  5. अगले दिन सुबह सब एक दूसरे को रंग लगाकर बधाई देते है और पुरे हर्ष उल्लास के साथ होली खेलते है।

होली पूजा सामग्री

होली की पूजा के लिए हमे कुछ सामग्री की आवश्यकता होती है नीचे दी गई है  कुछ सामग्री जो पूजा मे उपयोग होती है –

  1. घी का दिया
  2. धूपबत्ती और अगरबत्ती
  3. फूल
  4. चन्दन
  5. चावल
  6. मिठाई
  7. एक गिलास पानी
  8. उपले के टुकड़े
  9. रोली

होली 2017 पूजा मुहूर्त, तारीख और समय

इस साल 2017 मे होली 12 मार्च को है जिसकी पूजा का मुहूर्त शाम 06:31 मिनट से लेकर रात 08:23 मिनट तक का है। पूजा के मुहूर्त इसीलिए निकाले जाते है ताकि पूजा सभी रीती रिवाज़ के साथ और बिना किसी बाधा के सम्पन हो। सभी पूजा के मुहूर्त विद्वान पंडितो द्वारा निकाले जाते है। इसीलिए जरुरी है की हम अपनी पूजा विधि पूर्वक और मुहूर्त के अनुसार ही करे। जैसा की होलिका दहन 12 मार्च को है जबकि रंग से खेलने वाली होली अगले दिन 13 मार्च को है। होली खेलने की शुरूआत प्रातः काल से ही हो जाती है और दोपहर के समय तक सभी पूरी उमंग और उत्साह के साथ होली खेलते है। यह त्योहार हर्ष और उल्लास से भरपूर्ण होता है।

होलिका दहन तारीख 12th मार्च 2017, रविवार
होलिका दहन मुहरत का समय शाम 6:31 PM से शाम 8:23 तक
होलिका दहन मुहरत अवधि 1 घंटा 59 मिनट

रंग वाली होली खेलने की तारीख – 13th मार्च 2017, सोमवार









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