H-1 B वीज़ा क्या है? इसमें नए बदलाव, नियम और इसकी क्यों जरुरत है?




H-1 B Visa in Hindi

H-1 B वीज़ा क्या है?

H-1 B वीज़ा के ऐसा वीज़ा है जिसके अन्तर्ग्रत किसी भी देश का व्यक्ति या कर्मचारी अमेरिका में जाकर 6 साल तक काम कर सकता है। यह वीज़ा अमेरिका की कम्पनी केवल उन्हें ही देती है जिनके पास काम करने का जज्बा हो और उनकी अमेरिका में कमी हो। यह वीज़ा सभी कर्मचारियों को नही मिलता है इसके लिए बहुत से नियम और कानून होते है। अगर कोई व्यक्ति उन सब नियमो के अन्तर्ग्रत आता है तभी उसे यह H-1 B वीज़ा प्राप्त होता है। इस वीज़ा की मांग बहुत ज्यादा है जिसके चलते हर साल इसे लॉटरी के रूप में भी निकाला जाता है। भारत में बहुत सी ऐसी कंपनिया है जो इस वीज़ा का सबसे ज्यादा लाभ उठाती है जैसे की टीसीस, विप्रो, इनफ़ोसिस आदि। इनके अलावा और भी बहुत सी कंपनी है जो इस वीज़ा का इस्तेमाल करती है। H-1 B वीज़ा की सबसे अच्छी खासियत यह है की इसकी वजह से बहुत से लोग अमेरिका में बसने का अपना रास्ता आसान बना सकते है। यह वीज़ा हर एक को नही मिलता है इसके लिए सभी नियमो का पालन करना पड़ता है।

H-1 B वीज़ा में नये बदलाव

H-1 B वीज़ा में आये नए बदलाव के मुताबिक अब ऐसा नही होगा की अगर पति या पत्नी में से किसी एक के पास H-1 B वीज़ा है तो दूसरे को भी वहा रहने की मंजूरी मिल जाएगी। नये बदलाव में यह सुविधा नहीं मिलेगी। इसके अलावा इन सब कानून, लड़ाई, हमले और ट्रम्प के बदलाव को देखते हुए इस बार अमेरिका के विश्विद्यालयों में भारतीय छात्रों की संख्या तेज़ी से घटती हुई दिखाई दे रही है। सबके मन में एक तरह का डर आ गया है और उन्हें सुविधाएं ना मिलना भी इसका एक मुख्य कारण माना जा रहा है। अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय और चीन छात्रों की संख्या लगभग पाँच लाख है लेकिन इस बार इनकी संख्या में 40 परसेंट की गिरावट देखने को मिली है। यह एक बहुत ही बड़ा चिंता का विषय बनता जा रहा है।

H-1 B जरूरते

H-1 B वीज़ा की जरुरत उन सभी कर्मचारियों को होती है जो अमेरिका में आकर काम करना चाहते है। यह वीज़ा केवल उन्ही लोगो को मिलता है जिनके पास कंपनी खुद एक प्रस्ताव भेजती है। कुछ जरुरी योग्यताएं होती है जिसके बाद ही कोई कर्मचारी H-1 B वीज़ा को प्राप्त कर सकता है। जैसे इस वीज़ा को पाने वाले कर्मचारी की सैलरी कम से कम 60 हज़ार डॉलर यानि की 40 लाख रुपये साल होनी चाहिए साथ ही व्यक्ति को कम से कम 3 साल का एक्सपीरियंस भी होना चाहिए। बहुत सी ऐसी कंपनी है जो फेक चीज़े दिखाकर अपने कर्मचारी को अमेरिका भेजती है लेकिन अब ऐसा नही होगा  इन सब चीज़ों पर सख्त कार्यवाही और जाँच की जाएगी।

H-1 B का प्रोग्राम

ट्रम्प  के नये नियम कानून के मुताबिक अब भारत के आई टी प्रोग्रामर्स इस सुविधा का फायदा नही उठा सकेंगे। उनका कहना यह है की बहुत सी कंपनी H-1 B वीज़ा प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल करती है जिससे उनके देश का नाम और पैसा दोनों ही खराब हो रहा है ऐसा वो बिलकुल नही चाहते इसीलिए उन्हने यह बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। यह भी साफ कर दिया गया है की जब भी यह प्रक्रिया शुरू होगी और H-1 B वीज़ा दिया जएगा तो जाँच और कार्यवाही दोनों ही सख्त कर दी जाएगी और सभी बातो को देखने के बाद ही वीज़ा देने का विचार किया जाएगा। पहले की तरह अब कुछ नही होगा कोई भी व्यक्ति H-1 B वीज़ा प्रोग्राम का गलत फायदा नही उठा पाएगा।

H-1 B के नियम

H-1 B वीज़ा को प्राप्त करने की लिए कुछ नियमो का पालन करना पड़ता है उसके बाद ही किसी कर्मचारी को यह वीज़ा प्राप्त होता है-

  1. नये नियम के मुताबिक अमेरिका ने H-1 B वीज़ा की प्रीमियम प्रोसेसिंग को 6 महीने के लिए रोक दिया है। इस पर जब भारत ने अमेरिका से बात की तो उन्होंने यह आश्वासन दिलाया की वो इस समस्या को जल्द ही दूर करेंगे।
  2. प्रीमियम प्रोसेसिंग एक ऐसा प्रोसेस है जिससे H-1 B वीज़ा की सभी ऍप्लिकेशन्स को जल्द से जल्द आगे बढ़ाया जाता है और सभी काम को पूरा होने में 3 से 6 महीने का समय लगता है लेकिन बहुत सी ऐसी कंपनिया भी है जो 1225 डॉलर का प्रीमियम अदा करने पर H-1 B वीज़ा को 15 दिन में ही जारी कर देती है।
  3. अब अमेरिका ने इस प्रीमियम पर 6 महीने के लिए रोक लगा दिया है। माना जा रहा है की पिछले कुछ सालो से वीज़ा को लेकर बहुत से विरोध चल रहे थे और बहुत सी कम्पनी इसका गलत फायदा उठा रही थी उन्ही सब की जाच पड़ताल के लिए अमेरिकी सरकार ने यह कदम उठाया है।

H-1 B वीज़ा पर रोक भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है लेकिन अमेरिका ने यह भरोसा दिलाया है की कुछ ही समय में यह रोक बंद हो जाएगी लेकिन कानून और कार्यवाही दोनों की सख्त कर दिए जाएंगे। यह सभी जानते है की इन सबका असर सबसे ज्यादा भारत पर होगा क्योंकि इसमें 9.5 भारतीय आईटी कंपनी का योगदान है। उम्मीद है यह मुददा जल्द ही सुलझ जाएगा और कोई सही समाधान सामने आएगा।




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