Chicken Pox – कारण, लक्षण और उपचार




Chicken Pox - कारण, लक्षण और उपचार

चिकन पॉक्स ज्यादातर बच्चो में पाने वाली एक बीमारी है। चिकन पॉक्स को छोटी माता भी कहा जाता है। इसे होने की कोई वजह नही होती देखा जाए तो यह रोग सभी को अपनी ज़िन्दगी में एक बार जरूर होता है। यह कोई खतरनाक रोग नही है। वैसे तो कुछ समय बाद यह खुद ही ठीक हो जाता है परंतु इसकी वजह से शरीर में कमजोरी आजाती है जिससे बच्चो को निमोनिया होने का खतरा रहता है। इसीलिए जरुरी है की कुछ एहतियात रखी जाए। वैसे तो चिकन पॉक्स एक वायरस की वजह से होता है जिसका नाम है Herpes Varicella Zoster  वायरस। यह एक ऐसा वायरस है जो आपके शरीर में घुस जाता है और आपको इस बीमारी से पीड़ित कर देता है। चिकन पॉक्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को फैलता है जैसे की जुकाम, हवा, थूक, छिकना, किसी के कपडे बिस्तर आदि। इसके लक्षण 10 दिन पहले ही दिखने शुरू हो जाते है।

चिकन पॉक्स के लक्षण

चिकन पॉक्स एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण बच्चो में 10 दिन पहले ही दिखने शुरू हो जाते है। चिकन पॉक्स के कुछ लक्षण इस प्रकार है-

1. शरीर में कमज़ोरी आना, थोड़ा सा चलकर या काम करके थक जाना।

2. बिना मौसम के सर्दी, जुकाम और खासी का हो जाना।

3. पूरे शरीर पर खुजली होना और कुछ ही दिन में उनका फुन्सी में बदल जाना। पहले यह फुन्सी छोटी होती है पर कुछ ही दिन में ये बड़ी हो जाती है और इनमे कुछ पदार्थ भी भर जाता है।

4. बुखार का आना और साँस लेने में तकलीफ होना।

5. सीने और मासपेशियो में असहनीय दर्द होना।

चिकन पॉक्स का उपचार

वैसे तो चिकन पॉक्स एक ऐसी बीमारी है जो कुछ ही समय में खुद ठीक हो जाती है। परंतु गरभवती महिलाओ और बच्चो को यह रोग हो जाए तो ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है। उनके साथ कोई लापरवाही ना करे उनमे इस तरह के लक्षण दिखते ही इसका उपचार अवश्य करे। नीचे चिकन पॉक्स के कुछ उपचार दिए गए है जो बहुत जल्द ही आपको इस समय से छुटकारा भी दिला देंगे और आपको कोई कमज़ोरी या कोई परेशानी भी नही होगी।

1. बुखार या कोई दर्द होने पर सीधा डॉक्टर की सलाह ले अगर ऐसा करना एकदम मुमकिन नही है तो एक पेरासिटामोल की गोली ले। अपने हिसाब से कोई भी दवा ना ले इससे आपको नुकसान हो सकता है।

2. जैसा की चिकन पॉक्स की फुन्सियो में बहुत खुजली होती है तो उन दानो और फुन्सियों को ना तो फोड़े ना खुजाए ऐसा करने से इन्फेक्शन हो सकता है। अपने डॉक्टर से संपर्क करे और उनपर लगाने की कोई पाउडर या क्रीम ले।

3. नीम के पत्तो को पानी में डालकर नहाए साथ ही नीम के पत्तो को मरीज़ के आसपास रखे ऐसा करने से कोई और कीटाणु उसतक नही पहुचेंगे।

4. इस बीमारी में शरीर में पानी की कमी नही होनी चाहिए इसीलिए पूर्ण मात्रा में पानी से भरपूर पदार्तो का पप्रयोग करे। खाने की चीज़ों में कोई भी भारी सामान ना खाए अपना आहार हल्का ही रखे।

 




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